UP: 10 साल चला केस, 1540 बार हाजिर हुए आरोपी, सजा- 5 हजार रुपये का जुर्माना, जानिए ये अनोखा मामला

Banda Court

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बांदा से एक अनोखा मामला सामने आया है. कोर्ट में चली सुनवाई और उसके बाद आए फैसले पर आश्चर्य जताया जा रहा है. दरअसल, मामूली कहासुनी और मारपीट के केस में बांदा की SC-ST कोर्ट में 10 सालों तक मुकदमा चला। 1540 बार आरोपी हाजिर हुए. कोर्च ने 10 साल से चल रहे केस में आरोपियों को 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि अदा नहीं कर पाने पर दोषियों को 15 दिन की कैद भुगतनी होगी.

विशेष अभियोजक विमल सिंह ने बताया, बांदा के वासी गांव निवासी हीरालाल की बकरी पड़ोसी कलुआ के घर में घुस जाने पर दोनों पक्षों में मारपीट हो गई थी. आरोप था कि कलुआ, उसका भाई सुनील और उसकी पत्नी चुन्नी ने हीरालाल की मां को पीट-पीटकर घायल कर दिया था और जान से मारने की धमकी दी थी. हीरालाल ने 4 मई 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी. विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट की अदालत में 10 वर्ष तक मुकदमा चलता रहा.

मामला कोर्ट में विचाराधीन था. बीते बुधवार को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट मोहम्मद कमरुज्जमा खान ने 10 वर्ष बाद इस मामले में फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा, दोषियों को या तो पांच हजार रुपए का जुर्माना अदा करना होगा या फिर 15 दिन की सजा काटनी होगी.

आरोपियों पर दर्ज था SC-ST का मुकदमा

पीड़ित व्यक्ति हीरालाल अनुसूचित जनजाति था, जिस कारण आरोपियों पर SC-ST एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया. विमल सिंह ने बताया, तीनों आरोपी 10 वर्ष में अदालत लगभग 1,540 बार हाजिर हुए. आरोप था कि गांव निवासी कलुआ, उसका भाई सुनील और उसकी पत्नी चुन्नी ने हीरालाल की मां को पीट-पीटकर घायल कर दिया था और जान से मारने की धमकी दी थी.

दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने सुनाई सजा

साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर न्यायाधीश ने दोषी पाए जाने पर कलुआ, उसका भाई सुनील और उसकी पत्नी चुन्नी पर 5 हजाप रुपए का जुर्माना लगाया. कोर्ट ने कहा, यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं कर पाते हैं तो 15 दिन की जेल काटनी होगी.

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