TV9 Inside Story: ऐसी भी एक महिला IAS जिसने रिश्वत की रकम से अस्पताल बनवा डाला ताकि वो…!

Ias Pooja Singhal

झारखंड की पूर्व खनन सचिव और 2000 बैच की आईएएस अफसर चर्चित नौकरशाह पूजा सिंघल (IAS Pooja Singhal) की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. इसके सबूत 5 हजार पन्नों के उस आरोप-पत्र में (Chargesheet against IAS Pooja Singhal) मौजूद हैं जो, मंगलवार को ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच टीम ने कोर्ट में दाखिल किया है. चार्जशीट में दर्ज मजमून को पैनी नजर से पढ़ने पर पता चलता है कि पूजा सिंघल आईएएस होने का पूरा पूरा नाजायज फायदा लेने में लंबे समय से जुटी हुई थीं. यह सब गोरखधंधा करने के दौरान वे इस बात का भी खास ध्यान रख रही थीं कि, किसी भी तरह से वे सरकारी जांच एजेंसियों के रडार पर न आएं. इसके लिए उन्होंने ‘अंडर-टेबल’ की गई रकम उगाही को खपाने के लिए एक मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोल लिया था. ताकि अस्पताल में काली कमाई को खपाया जा सके. अस्पताल में लगी काली कमाई पर सरकारी एजेंसियों की नजर जल्दी नहीं पड़ेगी. पूजा सिंघल को इसका पूरा विश्वास था.

भारी-भरकम चार्जशीट के जितने अंदर झांकिए उसके भीतर पूजा सिंघल के उतने ही काले-कारनामे और धन उगाही से जुड़े तथ्य पढ़ने को मिलते हैं. ईडी की पूजा सिंघल मामले में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, उगाही की मोटी रकम का अधिकांश हिस्सा पूजा सिंघल ने सबसे पहले अस्पताल के निर्माण में ही खर्च किया. जब अस्पताल शुरू हो गया तो फिर उसके बाद होने वाली अवैध कमाई का अधिकांश हिस्सा वो इसी अस्पताल के संचालन पर खर्च करके काली कमाई को ‘सफेद’ करने में जुट गईं. जोकि सबसे सस्ता और सुरक्षित रास्ता उसे लगा था.

पूजा सिंघल ने नकद खर्च से बनवाया अस्पताल

प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement) द्वारा कोर्ट में दाखिल आरोप-पत्र में साफ-साफ लिखा है कि, पूजा सिंघल ने अस्पताल का निर्माण नकद खर्च करके कराया था. न कि अस्पताल की स्थापना के लिए उन्होंने किसी तरह का कोई कर्ज किसी से लिया था. यहां बताना जरूरी है कि कुछ दिन पहले ही पूजा सिंघल को ईडी ने गिरफ्तार किया था.पूजा सिंघल के ऊपर आरोप है कि उन्होंने मलाईदार और ताकतवर कुर्सी पर रहते हुए मनरेगा फंड में हेराफेरी की. साथ ही और भी तमाम संदिग्ध लेनदेन को अपनी छत्रछाया में अंजाम दिलवाया. गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही नौकरशाह को राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया था.

44 साल की यह महिला नौकरशाह बीते करीब 3 साल से सरकारी एजेंसियों के रडार पर थीं. वे राज्य में उद्योग सचिव भी रह चुकी हैं. जबकि राज्य खनन-भू-विज्ञान महकमे के सचिव का उनके पास अतिरिक्त प्रभार था. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि, पूजा सिंघल की पहुंच राज्य की हुकूमत में किस कदर की ऊंची या मजबूत थी, जिसके चलते इस महिला आईएएस नौकरशाह को राज्य की हुकूमत ने तीन-तीन मलाईदार महकमों की बागडोर दे रखी थी. हालांकि अब जब पूजा सिंघल ईडी के जाल में बुरी तरह से फंस चुकी है. तो अपना पीछा छुड़ाने के लिए राज्य सरकार ने भी उसे निलंबित कर दिया है. जोकि नियमानुसार होता ही है. इसमें राज्य सरकार ने अपनी ओर से कोई एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी कदम नहीं उठाया है.

छापेमारी के दौरान मिली करीब 17.79 करोड़ की नकदी

पूजा सिंघल के साथ ही सुमन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था. दोनो ही गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में हैं. ईडी सूत्रों की मानें तो पूजा सिंघल के अड्डों पर एजेंसी ने, हाथ डालने से पहले काफी मजबूत सबूत बहुत पहले ही जुटा लिए थे. ताकि कहीं यह मामला मतलब पूजा सिंघल सी हाईप्रोफाइल नौकरशाह ईडी के ही गले की फांस कोर्ट में जाकर न बन जाए. ईडी ने सबसे पहले 6 मई को रांची में पूजा सिंघल, उसके बिजनेमैन और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट पति अभिषक झा के अड्डों पर छापेमारी शुरू की थी. छापों के दौरान ईडी जब सुमन कुमार के अड्डे पर पहुंची तो एजेंसी को उसके अड्डों से करीब 17.79 करोड़ की नकदी मिली थी.

अब ईडी द्वारा कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि, गिरफ्तार महिला नौकरशाह पूजा सिंघल ने पल्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण एक सोची समझी योजना, रणनीति के तहत करवाया था. अस्पताल के निर्माण में पूजा सिंघल ने विशेष रुचि भी दिखाई थी. इस सबके पीछे मकसद यही था कि, काली कमाई को ‘सफेद’ करने के लिए अस्पताल से बेहतर पूजा के पास दूसरा रास्ता नहीं था. यहां उल्लेखनीय है कि 17 जून को इस मामले में पूर्व जूनियर इंजीनियर राम विनोद प्रसाद सिन्हा भी गिरफ्तार किया जा चुका है. उसे पश्चिम बंगाल से जांच एजेंसी ने पकड़ा था. ईडी ने जेई राम बिनोद सिन्हा के खिलाफ मनरेगा में हुए करीब 18 करोड़ के घोटाले में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था.

2007 से लेकर 2013 के बीच भी चर्चा में रहीं पूजा सिंघल

राम विनोद सिन्हा से भी जांच एजेंसी को कई सनसनीखेज जानकारियां मिली थीं. जिनमें बताया गया था कि वह डीसी दफ्तर को पांच फीसदी कट मनी पहुंचाता था. जांच एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो, चर्चित महिला नौकरशाह ने 2007 से लेकर 2013 के बीच के वर्षों में खूंटी पलामू के में उपायुक्त और डीएम के पद पर भी नौकरी की थी. उस वक्त भी वो खासी चर्चाओं में रही थी. मगर उसके काले कारनामों पर बोलने की जुर्रत कोई नहीं कर सका था. चार्जशीट में तो जांच एजेंसी ने यहां तक लिख दिया है कि कैसे बंद बैग में रुपए रखकर पूजा सिंघल तक पहुंचाए जाते थे.

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