Jagannath Temple: धरती का वैकुंठ कहलाता है जगन्नाथ मंदिर, जहां हवा के विपरीत लहराता है ध्वज, जानें इससे जुड़ी सभी रहस्य

Know Unknown And Interesting Facts About Lord Jagannath Temple Of Puri Rath Yatra 2022 in Hindi

भारत में हिंदू आस्था से जुड़े कई ऐसे पावन धाम हैं, जो अपने भीतर तमाम तरह के रहस्य, चमत्कार और पौराणिक इतिहास को समेटे हुए हैं. इन्हीं में से एक है ओडिशा (Odisha) के पुरी शहर में स्थित भगवान श्री जगन्नाथ का मंदिर जो न सिर्फ अपनी भव्यता के लिए बल्कि और हर साल होने वाली पावन रथ यात्रा के लिए जाना जाता है. भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) का यह मंदिर हिंदू धर्म से जुड़े चार प्रमुख पावन धाम में से एक है. समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कुष्ण (Lord Krishna) को समर्पित है, जिनके साथ यहां पर उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के भी दर्शन होते हैं. सैकड़ो साल पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो आज भी सुनने वालों को दातों तले अंगुलियां दबाने के लिए मजबूर कर देती हैं. आइए भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े ऐसे ही अनसुनी बातों को विस्तार से जानते हैं.

जगन्नाथ मंदिर की नहीं बनती परछाई

पुरी के भव्य जगन्नाथ मंदिर को बेहद ही खूबसूरत कलिंग शैली में बनाया गया है. इस मंदिर की खासियत है कि दिन के समय इसमें कभी भी परछाईं नहीं बनती हैं. जिसे भगवान जगन्नाथ के भक्त का बड़ा चमत्कार मानते हैं.

अनोखा है मंदिर के शिखर पर लगा चक्र

भगवान जगन्नाथ मंदिर के भीतर हर एक चीज अपने आप में अनोखी और रहस्य को समेटे हुए है. मंदिर के शिखर पर लगे सुदर्शन चक्र की बात करें तो इसे आप जिस ओर से भी देखें, उसे आप हमेशा अपनी ही तरफ घूमा हुआ पाएंगे.

हवा के विपरीत लहराता है भगवान का ध्वज

भगवान जगन्नाथ के मंदिर के उपर लगे चक्र की तरह उनका ध्वज भी अपने आप में विशेष है, जिसे परंपरागत तरीके से मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन बदला जाता है. मंदिर के शिखर पर लहराते हुए ध्वज की खासियत है कि यह हमेशा हवा के विपरीत लहराता है. मंदिर से जुड़े इस रहस्य को भी आज तक कोई नहीं सुलझा पाया है.

मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ता कोई पक्षी

जगन्नाथ का जिसका अर्थ पूरे जगत का नाथ या फिर कहें जगत का स्वामी होता है, उनके पुरी स्थित प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि उसके ऊपर से कोई पक्षी नहीं उड़ता है. इसके पीछे मान्यता यह भी है कि इस पावन धाम की रक्षा भगवान विष्णु के वाहन माने जाने वाले गरुण देवता करते हैं. जिसके कारण यहां पर कोई भी पक्षी मंदिर के शिखर के ऊपर से नहीं उड़ता है.

तब नहीं सुनाई पड़ती समद्र की आवाज

समुद्र तट पर बने भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर की खासियत है कि इस मंदिर की देहरी को जैसे ही आप पार करके अंदर प्रवेश करते हैं आपको समुद्र की आवाज अचानक से आनी बंद हो जाती है, लेकिन जैसे ही आप देहरी को पार करके बाहर आते हैं, आपको दोबारा समुद्र की आवाज सुनाई पड़ने लगती है.

अनोखे तरीके से तैयार होता है भगवान का भोग

भगवान जगन्नाथ मंदिर की तमाम चीजों की तरह उनकी रसोईं भी अपने आप में अनोखी है, जाहं पर तैयार किया जाने वाला प्रसाद प्रतिदिन मिट्टी के बर्तन में तैयार होता है और एक बार प्रयोग किए जाने के बाद उसका दोबारा प्रयोग नहीं होता है. खास बात यह भी कि प्रसाद को पकाने के लिए जब एक बर्तन के ऊपर दूसरे जो बर्तन रखे जाते हैं, उसमें ऊपर वाले मिट्टी के मटके में रखा अन्न सबसे पहले और नीचे रखे मटके में रखी चीजें सबसे अंत में पकती हैं.

कभी कम नही पड़ता भगवान जगन्नाथ का प्रसाद

प्रतिदिन पवित्रता और नियम से तैयार किए जाने वाले प्रसाद से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह है कि सैकड़ों-हजारों तीर्थयात्रियों के पहुंचने के बाद भी कम नहीं पड़ता है और न ही बचता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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