Infertility Problems: बांझपन के रिस्क से बचना चाहती हैं तो एक्सपर्ट की बताई इस तकनीक का लें सहारा

Infertility Problems

कुछ महिलाएं अपने करियर पर फोकस करने के चलते शादी के कई सालों बाद बेबी प्लान करती हैं, लेकिन कुछ मामलों में इस देरी की वजह से वे मां नहीं बन पाती है. बांझपन (Infertility) की इस समस्या के कारण महिलाएं आईवीएफ क्लीनिकों के चक्कर भी लगाती है. हालांकि कई बार आईवीएफ की सहायता से भी मां नहीं बन पाती है. अगर आप भी एक कामकाजी महिला हैं और इनफर्टिलिटी के रिस्क से बचना चाहती है तो एक्सपर्ट की बताई गई एक तकनीक का सहारा ले सकती हैं. इसके माध्यम से आप अपनी इच्छा के अनुसार प्रेगनेंट (Pregnant) हो सकती हैं. इस तकनीक से 35 से 36 साल की उम्र तक गर्भधारण किया जा सकता है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं क्या है ये तरीका और इसके फायदे.

आईवीएफ वर्ल्ड ग्रुप की चेयरमैन डॉ. गुंजन गुप्ता बताती हैं कि किसी भी महिला के लिए मां बनना जिंदगी का एक सुखद अहसास होता है, लेकिन आजकल की खराब लाइफस्टाइल, बीमारियों का बढ़ता दायरा और खानपान की गलत आदतों की वजह से महिलाओं में बांझपन की समस्या बढ़ रही है. मानसिक तनाव, कामकाज के चलते समय न मिल पाना और हार्मोन में आई गड़बड़ी के कारण भी महिलाएं मां नहीं बन पाती हैं. कई बार हार्मोंस में बेलेंस ठीक नहीं रहता है, जिसकी वजह से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है. इसके अलावा फेलोपियन टयूब में कोई खराबी आने से भी प्रेगनेंसी में परेशानी आती है.

एग फ्रीजिंग ( Egg Freezing) इन सभी समस्याओं का एक समाधान है. ये एक ऐसी तकनीक है, जिसमें महिला के एग निकालकर उन्हें फ्रीज कर के स्टोर कर दिया जाता है. बाद में अपनी इच्छा के मुताबिक, जब महिला मां बनना चाहे तो उसके एग को भ्रूण के रूप में गर्भ में पहुंचा दिया जाता है. जो महिलाएं देरी से प्रेगनेंसी चाहती है उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प है. महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे34 से 35 साल की उम्र में एग फ्रीज करवा लें.

गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेस में न रहें

डॉ. गुजन का कहना है कई बार गर्भावस्था के दौरान महिलाएं स्ट्रेस में रहती हैं. इससे उनके मन में नकारात्मक विचार आते हैं. अगर महिला स्ट्रेस में रहेगी तो उससे बच्चे पर भी इसका असर पड़ेगा. इसलिए जरूरी है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं खुद का ध्यान रखें. इसके अलावा कामकाज से समय निकालकर आराम करें. इसके लिए आरामदायक कपड़े पहने और फ्लैट चप्पल पहन कर ही दफ्तर जाए. धूम्रपान और शराब से दूर रहें. भीड़ वावे इलाके में और लंबी यात्रा करने से बचें.

पीसीओएस को हल्के में न लें

डॉ. के मुताबिक, आजकल महिलाओं में पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या काफी बढ़ गई है. इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये एग और उनके हार्मोन में हुए बदलाव से जुड़ी एक समस्या है. इस बीमारी में ओवरी में सिस्ट बन जाता है. पीसीओएस होने पर पीरियड्स भी सही समय पर नहीं आते. वजन का बढ़ना और चेहरे पर बाल आना भी इसका एक लक्षण है. अगर ऐसी कोई समस्या दिख रही है तो तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए. क्योंकि पीसीओएस के कारण बांझपन हो सकता है.

Admission.com
www.lyricsmoment.com
admission9.com
lyricsmoment.com

Leave a Reply

Your email address will not be published.