IND vs ENG: टीम इंडिया की ताकत ही बनी उसकी कमजोरी, जोहनिसबर्ग से एजबेस्टन तक हार की यही कड़वी सच्चाई

Indian Cricket Team Ind Vs Eng (2)

बीते कुछ सालों में टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम (Indian Cricket Team) को विदेशों में ज्यादा सफलताएं मिली हैं. ऑस्ट्रेलिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां टीम इंडिया ने लगातार दो बार टेस्ट सीरीज जीती. टीम इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका में भी सीरीज जीतने की स्थिति में थी, लेकिन जीत नहीं पाई. फिर भी टीम इस स्थिति में इसलिए थी क्योंकि उसके पास बेहतरीन तेज गेंदबाजी आक्रमण है, जिसने लगातार सफलताएं दिलाई हैं. टीम इंडिया की सफलता के पीछे ये सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन एजबेस्टन टेस्ट (Edgbaston Test) में मिली हार ने फिर इस ताकत की ही एक बड़ी कमजोरी की ओर ध्यान खींचा है, जो अब गंभीर समस्या बनती दिख रही है क्योंकि ऐसा एक या दो बार नहीं, बल्कि लगातार तीसरी बार हो गया है.

378 रन नहीं हुए डिफेंड

भारत और इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन टेस्ट मंगलवार 5 जुलाई को खत्म हो गया, जिसमें मेजबान इंग्लैंड ने रिकॉर्ड 378 रन का लक्ष्य हासिल कर जीत दर्ज की. ये लक्ष्य हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन ज्यादा बड़ी इसलिए है, क्योंकि इंग्लैंड ने इसे भारत की मजबूत बॉलिंग के सामने हासिल किया. इंग्लैंड के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यही टीम इंडिया के लिए असली चिंता है, क्योंकि विदेशी जमीन पर ये लगातार तीसरा टेस्ट मैच था, जिसमें भारतीय टीम चौथी पारी में अपने स्कोर को डिफेंड करने में नाकाम रही.

चौथी पारी में गेंदबाजी की धार कुंद

चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा करना कभी भी और किसी भी परिस्थिति में आसान नहीं होता. उसमें भी जब स्कोर 200 या 300 से ज्यादा का होता है, तो इसमें गिने-चुने मौकों पर ही चेज करने वाली टीम को सफलता मिलती है, लेकिन टीम इंडिया फिलहाल इसमें चूक रही है और इसकी शुरुआत इसी साल जनवरी से हुई है. साउथ अफ्रीका दौरे पर इस साल जनवरी में टीम इंडिया ने लगातार दो मैच इसी तरह गंवाए.

जोहानिसबर्ग में खेले गए दूसरे टेस्ट में साउथ अफ्रीका की अपेक्षाकृत कमजोर बैटिंग ने 240 रनों का मुश्किल लक्ष्य सिर्फ 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया. फिर केपटाउन में हुए अगले ही टेस्ट में दोबारा साउथ अफ्रीका ने चौथी पारी में 212 रनों का लक्ष्य इसी तरह 3 विकेट खोकर ही बड़ी आसानी से हासिल कर लिया था.

आंकड़े बता रहे कड़वी सच्चाई

अब एजबेस्टन में भी भारतीय टीम सिर्फ 3 विकेट ही झटक सकी, जबकि इंग्लैंड ने करीब 77 ओवरों में ही लक्ष्य हासिल कर लिया. टीम इंडिया की चौथी पारी की समस्या को और बारीकी से समझाने के लिए इन आंकड़ों पर नजर डालनी होगी. इस साल खेले गए तीन टेस्ट मैचों में चौथी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने कुल 207.5 ओवरों की गेंदबाजी की, जिसमें उन्हें सिर्फ 8 विकेट ही मिले. यानी टीम ने 1 विकेट के लिए औसतन 100.25 रन खर्च किए, जबकि एक विकेट के लिए उन्हें 155.8 गेंद (स्ट्राइक रेट) का इंतजार करना पड़ा. इस दौरान भारतीय गेंदबाजों की किफायत की दर भी 3.85 रन प्रति ओवर रही. यानि अगले विदेशी दौरे से पहले भारतीय टीम को इस कमजोरी को सुधारना होगा.

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