Homeopathy Medicine: होम्योपैथी अस्थमा और एक्जिमा जैसी बीमारियों का इलाज कर सकती है

Homeopathic Medicine

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, होम्योपैथी दवाएं (Homeopathy Medicine) इलाज की दूसरी सबसे लोकप्रिय विधि है. पूरी दुनिया में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है. और वास्तविक नतीजों से पता चलता है कि यह कोरोना (Corona) के साथ-साथ, कनेक्टिव टिशू से संबंधित गड़बड़ियां और कई तरह के ऑटो-इम्यून डिस्ऑर्डर को नियंत्रित करने में मदद करती है. कुछ एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट को लेकर बढ़ती जागरूकता, इलाज की इनकी सीमित क्षमता या पहले से मौजूद दूसरी बीमारियों के कारण एलोपैथिक दवाओं को सहन करने में असमर्थता की वजह से बड़ी संख्या में लोग इस वैकल्पिक चिकित्सा को अपना रहे हैं.

लेकिन सोशल मीडिया पर आए दिन कोई न कोई नई अफवाह फैलती रहती है. और इन्हें स्पष्ट करना जरूरी है.

क्या होम्योपैथी के असर को लेकर कोई प्रमाण हैं?

डॉ. कल्याण बनर्जी क्लिनिक के सीनियर कंसल्टेंट कुशाल बनर्जी ने TV 9 को बताया कि दुनियाभर में होम्योपैथी पर हुए रिसर्च रिव्यू से पता चलता है कि कई बीमारियों में होम्योपैथिक दवाएं काफी बेहतर असर दिखाती हैं.

वे बताते हैं, “इसके असर के प्रमाण को लेकर नए-नए रिसर्च हो रहे हैं. भौतिकी और रसायन विज्ञान के नए सिद्धांत होम्योपैथिक दवाओं की एक्शन को समझा रहे हैं. इससे इस चिकित्सा के प्रति भरोसा बढ़ता है. बेशक, अभी आगे काफी कुछ करने की आवश्यकता है. होम्योपैथिक दवा उद्योग और रिसर्च संस्थानों में ज्यादा प्रयास किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि बहुत से लोग सोचते हैं कि होम्योपैथी के डॉक्टर अनट्रेंड होते हैं. वह कहते हैं, “भारत के होम्योपैथ ग्रेजुएट होने से पहले साढ़े पांच साल का कोर्स करना पड़ता है. उनके पाठ्यक्रम में फार्माकोलॉजी को छोड़कर एमबीबीएस का पूरा सिलेबस शामिल होता है. इसके छात्र भी उन्हीं लेक्चर में शामिल होते हैं जो एमबीबीएस के छात्रों को दिया जाता है और ये उन्हीं की लाइब्रेरी का उपयोग करते हैं.”

क्या होम्योपैथिक दवाएं स्टेरॉयड हैं?

फार्मास्युटिकल स्टेरॉयड पारंपरिक चिकित्सा (एलोपैथी) का एक्सक्लूसिव डोमेन है. उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, जब कोई मरीज चमत्कारिक रूप से ठीक हो जाता है तब यह टैग होम्योपैथिक के साथ जुड़ जाता है. स्टेरॉयड होम्योपैथिक दवाओं का हिस्सा नहीं होते और होम्योपैथिक डॉक्टर फार्मास्युटिकल स्टेरॉयड नहीं लिख सकते.”

होम्योपैथिक दवाएं पुरानी बीमारियों का भी इलाज कर सकती हैं?

होम्योपैथिक दवाएं तेजी से काम कर सकती हैं, कभी-कभी कुछ मिनटों के अंदर. तेज दर्द, बुखार, दस्त जैसी स्थितियों में यदि सही दवा दी जाए तो इन दवाओं के सेवन के कुछ ही मिनटों में राहत मिल जाती है.

डॉ. बनर्जी बताते हैं, “ऐसी बीमारियां जो बहुत पुरानी हो जाती हैं या जिन्हें लाइलाज माना जाता है, होम्योपैथिक दवाएं इन पर अपना असर दिखा सकती हैं. इन दवाओं से एक्जिमा और आस्थमेटिक ब्रोंकाइटिस के मरीज ठीक हो चुके हैं.”

उन्होंने कहा, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पारंपरिक दवाओं (एलोपैथिक) के साथ होम्योपैथिक दवाएं दी जाती हैं.

एलोपैथिक दवा अचानक नहीं छोड़नी चाहिए

वे समझाते हुए कहते हैं, “ऐसे मरीज जो सालों से एलोपैथिक दवा ले रहे हैं उन्हें अचानक से इन्हें नहीं छोड़ना चाहिए. यदि डायबिटीज का कोई मरीज होम्योपैथी दवा चाहता है तो उसे एलोपैथिक दवा के साथ-साथ होम्योपैथिक दवा दी जा सकती है. धीरे-धीरे इसके असर और मरीज की प्रतिक्रिया के आधार पर और डॉक्टर की सलाह पर एलोपैथिक दवाओं को कम किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, किमोथेरेपी के दौरान मरीज बिना किसी चिंता के होम्योपैथिक इलाज भी जोड़ सकता है.”

वे बताते हैं कि होम्योपैथिक दवा लेने से समस्याएं और नहीं बढ़ती. डॉ बनर्जी ने कहा, “हालांकि, कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मरीजों ने एलोपैथिक दवा छोड़ा तो कुछ समय के लिए उनके लक्षण थोड़े बिगड़ते हैं.”

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