Himachal Assembly Election : हिमाचल में 6 बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बिना कैसा होगा कांग्रेस का चुनावी सफर

Veerbhdra Singh

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर कांग्रेस की चुनावी तैयारियां काफी तेज हो गई हैं. हालांकि तीन दशक में हिमाचल प्रदेश का यह पहला चुनाव है जब वीरभद्र सिंह के बिना कांग्रेस पार्टी चुनाव मैदान में उतरने जा रही है. वीरभद्र सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. वे हिमाचल के 6 बार मुख्यमंत्री भी बने, लेकिन उनके निधन के बाद उनके रिक्त स्थान की पूर्ति कर पाना कांग्रेस के लिए संभव नहीं दिखाई देता है. पार्टी के भीतर उनके कद के बराबर में कोई नेता नहीं है. यहां तक कि उनकी परछाई के बराबर भी नहीं है. इन दिनों उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री जैसे कांग्रेसी नेता चुनाव को लेकर अच्छे खासे सक्रिय हैं, लेकिन हिमाचल में कांग्रेस इस बार बिना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए हुए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी. 2021 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने सामूहिक नेतृत्व में 4 सीटों पर बड़ी सफलता पाई थी. इसलिए कांग्रेस के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं.

वीरभद्र सिंह के बिना कैसा होगा हिमाचल का चुनाव

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में वीरभद्र सिंह का नाम काफी बड़ा है. वह राज्य के 6 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कांग्रेस के भीतर उनकी जैसी शख्सियत अब किसी भी नेता की नहीं है. बल्कि हिमाचल में खुद वह अकेले पार्टी थे. जिनके भरोसे ही कांग्रेस चुनावों में सफलता प्राप्त करती थी. उनके निधन के बाद कांग्रेस के भीतर रिक्त स्थान को कोई नहीं भर सका है. उनकी कमी पार्टी को अब खलने लगी है. हिमाचल में बीते तीन दशक के भीतर वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री का चेहरा होते थे और उन्हीं के बलबूते पार्टी चुनाव में सफलता भी हासिल करती रही लेकिन उनके बिना अब कांग्रेस पहला विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है. हिमाचल में वीरभद्र सिंह का करिश्माई जादू मतदाताओं के सर चढ़कर बोलता था. वे कांग्रेस में जान फूंक देते थे इसके बलबूते हिमाचल में एक दो बार नहीं बल्कि वीरभद्र सिंह ने 6 बार सफलता दिलाई. अब उनके निधन के बाद उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह कांग्रेस में सक्रिय जरूर हैं लेकिन उनकी कमी को पूरा करने वाला कोई भी नेता दिखाई नहीं देता है.

हिमाचल में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे लड़ेगी कांग्रेस

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस इस बार बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ने जा रही है.पार्टी ने यह तय किया है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव होगा. 2021 में हुए उपचुनाव में सामूहिक नेतृत्व के चलते ही कांग्रेस को एक लोकसभा और 3 विधानसभा सीटों पर सफलता मिली थी. इसलिए इस फार्मूले पर विधानसभा चुनाव ही पार्टी लड़ेगी. वहीं पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री का चेहरा पहले से घोषित होने से फायदे से ज्यादा नुकसान है. इसी वजह से इस बार हिमाचल ही नहीं गुजरात में भी पार्टी बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव में उतरने का फैसला किया है.

हिमाचल में इन नेताओं के भरोसे कांग्रेस

हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से है. प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने 4.5 साल पूरे कर लिए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने ऐसे नेताओं को आगे किया है जिनके भरोसे चुनाव लड़ा जाएगा. कांग्रेस में में बड़े नेताओं में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह आशा कुमारी ,ठाकुर कौल सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खू जैसे बड़े नेता हैं. वहीं इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की घोषणा नहीं की है. वही पार्टी का मानना है कि इससे राजनीति में गुटबाजी बढ़ती है और पार्टी को नुकसान होता है.

आप से मिल रही है कांग्रेस को चुनौती

हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी इस बार चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने जा रही है.पंजाब में कांग्रेश को सत्ता से बाहर करने का काम आम आदमी पार्टी ने किया है. इस वजह से कांग्रेस ‘‘आप” से घबराई हुई है. हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है. वहीं कांग्रेस के मजबूत जनाधार वाले नेताओं को तोड़ने में भी जुटी है. ऐसी स्थिति में कांग्रेश को चुनाव तक अपने बड़े नेताओं को साथ लेकर चलना होगा.

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