Gujarat Assembly Election : राधनपुर विधानसभा सीट पर अल्पेश ठाकोर की दावेदारी से मुश्किल में भाजपा

Alpesh Thakor

गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो चली हैं. 2017 में कांग्रेस ने तीन युवा नेता अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी के चलते 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी . फिलहाल 2022 के आते-आते हैं इनमें से हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. अब केवल जिग्नेश मेवानी ही कांग्रेस में अकेले बचे हैं. अल्पेश ठाकोर समुदाय से आते हैं और पिछड़े वर्ग के एक बड़े नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं. हालांकि 2019 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा को ज्वाइन कर लिया था, लेकिन हाल के बयानों से यही लगता है कि वह भाजपा के अंदर भी घुटन महसूस कर रहे हैं. अब उन्होंने राधनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद से भाजपा पशाेपेश में है, क्योंकि इस सीट पर भाजपा के ही एक नेता लविंगजी ठाकोर जमे हैं. भाजपा के सामने संकट ये है कि वो ये विचार नहीं कर पा रही है कि इस सीट से किसे चुनाव लड़ाया जाए, हालांकि यहां अल्पेश की दावेदारी ज्यादा मजबूत लगती है, क्योंकि 2017 के चुनाव में अल्पेश ठाकोर ने इस सीट से जीत हासिल की थी.

गुजरात मे अल्पेश ठाकुर का वजूद

अल्पेश ठाकोर पिछड़ा समुदाय के एक बड़े नेता के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं. उन्होंने ठाकोर सेना का गठन भी किया है, जिसमें 9000 से ज्यादा समितियां हैं हर समिति में 50 परिवार शामिल हैं. 2019 में कांग्रेस को छोड़ भाजपा में आने वाले अल्पेश ठाकोर गुजरात में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं में मजबूत पैठ बना चुके हैं. वह एक युवा नेता माने जाते हैं जो आंदोलन से निकले हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में अल्पेश ने कांग्रेस के जनाधार को काफी मजबूत किया था, इसके चलते 1985 के बाद कांग्रेस इतनी सीटें जीत सकी थी. 2019 में अल्पेश ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया और बीजेपी में चले आये. उनके हालिया बयानों से यही लगता है की भाजपा के भीतर वह खुश नहीं हैं. वहीं सौराष्ट्र क्षेत्र में पटेल समुदाय के लोग भी अल्पेश ठाकोर की जनसभाओं में बड़ी संख्या में शामिल होते हैं. ऐसे में अल्पेश को केवल एक जाति से बांधकर रखना बेमानी होगा.

राधनपुर विधानसभा सीट पर विवाद

अल्पेश ठाकोर ने राधनपुर विधानसभा सीट से 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. हालांकि उन्होंने यह बयान बिना भाजपा के सहमति के ही दिया है. ऐसे में यहां के क्षेत्रीय बीजेपी नेता लविंगजी ठाकोर की स्थिति भी मुश्किल में पड़ गई है. 2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर अल्पेश ठाकोर ने जीत दर्ज की थी. वहीं यह सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए मिलाजुला परिणाम देने वाली रही है. इस सीट पर भाजपा ने 1998, 2002, 2007 में जीत दर्ज की है. इसके बाद इस सीट पर बीजेपी का कोई भी नेता जीत दर्ज नहीं कर सका है.

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