Dalai Lama Birthday : दलाई लामा के 87वें जन्मदिन पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें

Dalai Lama birthday special read some lesser-known facts about Tibetan spiritual leader Lhamo Thondup

तिब्बतियों के सबसे बड़े धर्मगुरू को दलाई लामा (Dalai Lama) कहते हैं. आज चौदवें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो का जन्मदिन है. 6 जुलाई 1935 को पूर्वी तिब्बत के ओमान परिवार में तेनजिन ग्यात्सो का जन्म हुआ था. दलाई लामा ने भगवान बुद्ध (Lord Buddha) के गुणों को अपने जीवन में अपनाया है, इसलिए उन्हें बुद्ध के गुणों का साक्षात रूप माना जाता है. दलाई लामा दया, करुणा और अहिंसा जैसे गुणों से ​भरपूर अद्भुत आंदोलनकारी हैं. तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद वे भारत आ गए थे. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मैक्लोडगंज में रहकर वे लगातार अहिंसात्मक रूप से तिब्बतियों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आज दलाई लामा के जन्म दिन के मौके पर आपको बताते हैं, उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें.

दलाई लामा से जुड़ी रोचक बातें

14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो ने 6 वर्ष की उम्र में मोनेस्टिक शिक्षा प्राप्त की थी. मोनेस्टिक शिक्षा में बौद्ध धर्म पर ज्यादा जोर दिया जाता है, लेकिन इसके अलावा उन्हें ललित कला, संस्कृत व्याकरण और चिकित्सा, कविता, नाटक, ज्योतिष, रचना और समानार्थक शब्द का भी अच्छा खास ज्ञान है.

शांति, अहिंसा, धार्मिक समझ और विश्वव्यपी जिम्मेदारी और करूणा के संदेश के लिए दलाई लामा को मानद डॉक्टरेट पुरस्कार जैसे 150 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. दलाई लामा 6 महाद्वीपों और 67 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके हैं.

वर्ष 1950 में जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया था तो उसके बाद दलाई लामा को राजनीतिक सत्ता संभालने के लिए आमंत्रित किया गया था. उस समय में चीनी नेताओं से मिलने ​बीजिंग गए थे. लेकिन चीनी सैनिकों का अत्याचार तिब्बतियों पर बढ़ता जा रहा था. 1959 में चीनी सैनिकों ने तिब्बत को अपने कब्जे में ले लिया, इसके बाद दलाई लामा को अपना निवास स्थान छोड़ना पड़ा.

दलाई लामा तब भारत आए और यहां हिमाचल के मैक्लोडगंज को अपनी कर्मभूमि ​बनाया. यहां से ही उन्होंंने दुनियाभर के तिब्बतियों को एक मंच पर लाने का काम किया. आज भी दलाई लामा आशावादी विचारों के साथ अहिंसात्मक रूप से तिब्बतियों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. तिब्बत की मुक्ति के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखने के लिए परमपावन दलाई लामा को वर्ष 1989 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है.

दलाई लामा ने तिब्बत की लोकतांत्रिक संविधान के लिए एक ड्राफ्ट पेश किया. आज निर्वासित तिब्बत सरकार का बाकायदा चुनाव होता है. 2011 में दलाई लामा ने खुद के रा​जनीतिक अधिकार सौंप दिए और खुद को रिटायर्ड घोषित कर दिया.

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