लालू प्रसाद यादव को भूत पकड़ कर ले जा रहा था श्मशान ! फिर तपेसर काका बनकर पहुंचे बरम बाबा, जानिए फिर क्या हुआ

Bihar Lalu Prasad

लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) बीमार हैं. बुधवार की रात उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाया गया है. दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चल रहा है. तेजस्वी यादव ने कहा है कि लालू प्रसाद के बॉडी में मूवमेंट नहीं है, उनका शरीर लॉक हो गया है. इसके बाद लालू प्रसाद के चाहने वाले उनके सेहतमंद होने के लिए दुआ कर रहे हैं, आरजेडी ने ट्वीट कर कहा है कि लालू जी सबके हैं, सब लालू जी के हैं! जिनका दिल बड़ा होता है, उसके दिल में सबके लिए जगह होता है! और सबके दिल में उनके लिए दुआ होता है! लालू प्रसाद की राजनीति पर भले ही विवाद हो सकता है. अदालत में उनपर साबित हुए दोष के बाद उस छवि पर भी प्रश्नचिन्ह है जो लालू परिवार और उनकी पार्टी दिखाती है.

लेकिन एक चीज पर कोई विवाद नहीं है वह लालू प्रसाद की जिंदादिली, उनका अंदाज और उनकी शैली जो उनके विरोधियों को भी लुभाता है.

गोपालगंज से रायसीना में लालू से जुड़े दिलचस्प किस्से

लालू यादव के जीवन-संघर्ष को लेकर आई एक किताब गोपालगंज से रायसीना में लालू प्रसाद से जुड़े कई किस्से हैं. जिसमें लालू प्रसाद का यही अंदाज बयां होता है. गोपालगंज से रायसीना में लालू प्रसाद का भूतों से सामना होने पर भी एक प्रसंग है.

लालू के अंदाज में लालू की कहानी

मेरे पिता तीन भाई थे. उनके एक भाई सूधन राय ने शादी नहीं की वो संन्यासी हो गए थे. वह काली माई और स्थानीय देवता बरम बाबा की पूजा करते थे.वह लोगों के शरीर में घुस गए भूतों को भगाते थे. हम जब कभी भात और मछली की बात करते थे, तो वह नाराज हो जाते और गालियां देने लगते. एक बार मेरा भी भूतों से सामना हो गया. यह गर्मियों की चमकदार पूर्णिमा की रात थी. हमारे घर के पीछे एक बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे बरम बाबा का ठिकाना था. गांव के एक काका सोरठी-बिरिजभार (भोजपुरी लोक प्रेमकथा) गा रहे थे और बरम बाबा के डेरे में रात के खाने के बाद घेरे में बैठकर लोग उन्हें सुन रहे थे. श्रोताओं में मैं भी शामिल था. मुझे चैता, बिरहा, होली, सोरठी और लोक गीत सुनना अच्छा लगता है. मैं आज भी इन्हें सुनता हूं, क्योंकि ये आपको जड़ों से जोड़े रखते हैं.

दो लड़कों के पीछे चल पड़े श्मशान

प्रस्तुति के दौरान वहीं बरम बाबा के नजदीक गेहूं के पुआल के ढेर में मेरी नींद लग गई. मुझे पता ही नहीं चला कि कब काका ने गाना बंद कर दिया और लोग घरों को चल दिए. अचानक दो लड़कों ने मेरे दोस्तों का स्वांग भरकर मुझे जगा दिया और अपने साथ आने के लिए उकसाया. मैं उनींदा था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. वे गांव के बाहर स्थित श्मशान की ओर बढ़ रहे थे और मैं आंखें मलता हुआ उनके पीछे चल रहा था. कुछ दूर चलने के बाद मैं वहीं खेत में लघुशंका के लिए बैठ गया. वे दोनों लड़के मेरे नजदीक खड़े रहे, उनके सिर और चेहरे आधे ढंके हुए थे. मैं जब पेशाब कर ही रहा था, उसी समय हमारे गांव के एक बुजुर्ग तपेसर बाबा अपनी हथेलियों में खैनी मलते वहां से गुजर रहे थे और उन्होंने पूछा, कौन है रे? मैंने जवाब दिया, हम हैं ललुआ.

बरम बाबा ने आकर बचाया

तुम कहां जा रहे हो? उठो और घर जाओ.जैसे ही तपेसर बाबा ने निर्देश देने के अंदाज में यह कहा, दोनों लड़के वहां से भाग गए. मैं घर लौट आया. अगले दिन सुबह मैं उन दोनों दोस्तों के पास गया, जो मुझे श्मशान घाट ले जा रहे थे. उन्होंने दावा किया कि वे तो रात में अपने घरों में सो रहे थे. यह सुनकर मैं भौंचक्का रह गया और तुरंत तपेसर बाबा के घर गया. उन्होंने भी कहा कि रात में जिस जगह पर वह मुझे मिले थे, वहां वह नहीं गए थे. उन्होंने कहा, मैं तो घर पर सो रहा था. मेरा तो दिमाग ही चकरा गया.

मां ने कहा कहां दोस्त के भेष में आए थे भूत

मैंने मां को सारी बातें बताई. वह बोलीं, जो लोग तुम्हारे दोस्तों का स्वांग भरकर आए थे, वे भूत थे. बरम बाबा ने तपेसर बाबा का रूप धारण कर तुमको बचाया. मेरे बेटे, बरम बाबा ने तुम्हें भूतों से बचाया, वरना वे तुम्हें श्शान घाट ले जाकर मार भी सकते थे. उन्होंने मुझे बरम बाबा की प्रार्थना करने की सलाह दी. आज तक जब कभी मैं अपने गांव जाता हूं बरम बाबा के सामने सिर झुकाए बिना आगे नहीं बढ़ता.

नलिन वर्मा की पुस्तक गोपालगंज से रायसीना’ से साभार

Admission.com
www.lyricsmoment.com
admission9.com
lyricsmoment.com

Leave a Reply

Your email address will not be published.