बकरीद से पहले जानवरों की अवैध हत्या पर असम सरकार ने लगाई रोक, SOP का सख्ती से पालने करने का दिया निर्देश

Assam Govt

इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद इस साल रविवार 10 जुलाई को मनाई जाएगी. बकरीद (Eid al-Adha 2022) से पहले असम सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को गायों, बछड़ों, ऊंटों और जानवरों की अवैध हत्या (Illegal Animal Slaughter) पर रोक लगा दी है. सरकार ने अवैध हत्या या बलिदान को रोकने के संबंध में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है. इसमें जानवरों और जानवरों के नियमों का उल्लंघन करने पर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना भी शामिल है.

असम ने पिछले साल एक कानून पारित किया था, जिसमें केवल कुछ ही जगहों पर गोमांस की बिक्री को निर्धारित किया गया था. इसमें बीफ ना खाने वाले समुदायों के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की बिक्री प्रतिबंध थी. इस कानून के मुताबिक, गाय और उनके बछड़ों को नहीं मारा जा सकता, साथ ही 14 साल से अधिक उम्र के मवेशियों को ही उनको मारने की अनुमति है.

कानून के मुताबिक, ‘कोई भी व्यक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसा करने की परमिशन वाले स्थानों को छोड़कर किसी भी रूप में सीधे बिक्री या पेशकश या बिक्री के लिए गोमांस उत्पादों को नहीं खरीदेगा, बशर्ते कि ऐसी कोई अनुमति ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों में नहीं दी जाएगी जो मुख्य रूप से हिंदुओं द्वारा बसाए गए हैं.’ कानून कहता है कि इसकी परमिशन जैन, सिख और अन्य गैर-बीफ खाने वाले समुदाय, किसी भी मंदिर, हिंदू धर्म से संबंधित अन्य धार्मिक संस्थानों या किसी अन्य संस्थान या क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित की जा सकती है.

इसमें आगे कहा गया है कि सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के बाद ही अधिकारियों की अनुमति से और लाइसेंस प्राप्त बूचड़खाने में ही मवेशियों का वध किया जा सकता है, और यदि इसका उल्लंघन किया जाता है तो आरोपी को तब तक जमानत नहीं मिलेगी जब तक कि सरकारी वकील को होने का मौका नहीं दिया जाता है. ऐसी याचिका पर सुनवाई नए कानून के तहत दोषी पाए जाने पर किसी व्यक्ति को आठ साल तक की कैद और पांच लाख तक का जुर्माना हो सकता है.

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