दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में खराब प्रदर्शन का ट्रेंड भारत और कोच द्रविड़ के लिए चिंताजनक

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शुभायन चक्रवर्ती

‘हमारे पास दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ इंग्लैंड में भी जीतने के कुछ अहम मौके थे. यह एक ऐसा मसला है जिस पर हमें काम करने की जरूरत है.’ हेड कोच राहुल द्रविड़ ने भारतीय टीम द्वारा दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीतने गंवाने के अवसरों पर अफसोस जताते हुए कहा. दोनों टेस्ट दौरों में भारत की स्थिति अच्छी थी लेकिन फिर भी भारत खाली हाथ घर लौट आया. अब यह देखने और जांचने का समय है कि आखिर दक्षिण अफ्रीकी और अंग्रेजी टीम के खिलाफ क्या गलती हुई. भारत ने इतिहास रचने के दो शानदार मौके गंवाए. वे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे थे. यहां तक कि सेंचुरियन में टीम इंडिया टेस्ट मैच जीतने वाली पहली एशियाई टीम बन गई थी. लेकिन पर्दे के पीछे के मुद्दों, चयनकर्ताओं के अध्यक्ष, तत्कालीन कप्तान के हंगामेदार प्रेस कांफ्रेंस और मैदान पर औसत दर्जे के खेल की वजह से दक्षिण अफ्रीका ने वापस मैच को अपनी मुट्ठी में कर लिया और सीरीज 2-1 से जीत ली.

उसके बाद द्रविड़ के लिए अगली बड़ी चुनौती आई कि वे इंग्लैंड के खिलाफ 2021 के अधूरे काम को पूरा करें. रवि शास्त्री की कोचिंग के तहत भारत ने सीरीज को 2-1 से जीता था लेकिन COVID-19 की वजह से वह सीरीज रोक दी गई थी. 298 दिनों बाद जब सीरीज का निर्णायक मैच सामने आया तो वह 2-2 से ड्रॉ हो गई क्योंकि इंग्लैंड ने भारत को हराने के लिए ऐतिहासिक 378 रनों का पीछा किया.

विदेशी धरती पर कमजोर नजर आ रही है टीम इंडिया

द्रविड़ के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कमजोर टीम के खिलाफ ही घरेलू सीरीज जीती है लेकिन विदेशी धरती पर इसे दोहरा पाने में विफल रहा है. अब तक भारत ने द्रविड़ की कोचिंग के तहत सिर्फ एक मैच जीता है और वो है सेंचुरियन टेस्ट. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट हार और इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट में पराजित होने के अलावे, एकदिवसीय सीरीज में दक्षिण अफ्रिका के खिलाफ 3-0 से क्लीन स्वीप और T20 के एक घरेलू सीरीज 2-2 से ड्रॉ रहा.

भारत की शानदार जीत दक्षिण अफ्रीका (घरेलू वनडे), वेस्टइंडीज (घरेलू वनडे और टी20 सिरीज), श्रीलंका (घरेलू टी20 और टेस्ट) और न्यूजीलैंड (घरेलू टी20ई) के खिलाफ हुई है. न्यूज़ीलैंड से दो टेस्ट मैचों की घरेलू सीरीज में भारत को दोनों टेस्ट मैच जीतने की उम्मीद थी, लेकिन कानपुर टेस्ट ड्रा होनो के बाद भारत वो सीरीज 1-0 से ही जीत सका.

द्रविड़ के नेतृत्व में भारत की एक कमजोरी सामने आई

द्रविड़ के नेतृत्व में भारतीय टीम की जो एक बड़ी कमजोरी सामने उभर कर आई है वह है बल्ले और गेंद से भारत की तीसरी और चौथी पारी का प्रदर्शन. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, भारत पिछला दो टेस्ट हार गया क्योंकि दक्षिण अफ्रिका ने 212 (न्यूलैंड्स) और 240 (वांडरर्स) का पीछा किया. इंग्लैंड के खिलाफ यह 378 रन का आंकड़ा था. न्यूलैंड्स में भारतीय गेंदबाज कामयाब नहीं हो पाए क्योंकि डीन एल्गर के 98 रन और शीर्ष और मध्य क्रम के बल्लेबाजों के बहुमूल्य योगदान की वजह से दक्षिण अफ्रीका सीरीज को बराबर कर सका.

वांडरर्स में भारत की तीसरी पारी जबरदस्त तरीके से लड़खड़ा गई जबकि ऋषभ पंत ने एक साहसिक शतक लागाकर कुछ हद तक लाज बचा ली. लेकिन इसके बावजूद भारत 212 रनों का बचाव नहीं कर सका और दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज बराबर कर ली. न्यूलैंड्स में, भारतीय गेंदबाज नाकामयाब रहे और डीन एल्गर के 98 रन और शीर्ष और मध्य-क्रम के बल्लेबाजों के बहुमूल्य योगदान से दक्षिण अफ्रीका को एक और टेस्ट सीरीज जीतने का अवसर मिला. और दक्षिण अफ्रिका के लिए तो भारतीय टीम एक पंचिंग बैग ही साबित हुई जब ODI सीरीज दक्षिण अफ्रीका ने 3-0 से जीत लिया.

एजबेस्टन में जीता हुआ मैच हार गया भारत

एजबेस्टन में भारत चौथे दिन की शुरुआत तक जीत की ओर बढ़ रहा था लेकिन वहां भी बल्लेबाजों ने निराश किया. नतीजतन, इंग्लैंड को जीत का एहसास होने लगा. फिर भी, टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इंग्लैंड द्वारा न तो 378 रनों के लक्ष्य का पीछा किया गया और न ही भारत ने किसी टेस्ट मैच की चौथी पारी में इतना अधिक अंतर दिया. इस बार गेंदबाजों पर सभी की निगाहें टिकी रहीं लेकिन वो भी लड़खड़ाते ही रहे. एजबेस्टन में सात विकेट से हारने के बाद द्रविड़ ने कहा, “मैं कहूंगा कि हमने तीन दिनों तक खेल को अपने कब्जे में रखा लेकिन हो सकता है कि हमने दूसरी पारी में अच्छी बल्लेबाजी नहीं की. गेंदबाजी में भी हम उस तीव्रता को बनाए रखने में कामयाब नहीं रहे. और हमें इंग्लैंड को श्रेय देना होगा जिस तरह से उन्होंने खेला. रूट और बेयरस्टो ने शानदार साझेदारी की, हमें 2-3 मौके मिले लेकिन हम उसका फायदा नहीं उठा सके.’

इन वर्षों में भारत ने घरेलू मैदान पर अपनी दबंगई तो दिखाई लेकिन शास्त्री-कोहली युग के दौरान ऑस्ट्रेलिया में जीत और इंग्लैंड में 2-1 की बढ़त के साथ भारत ने अपनी छवि बदल दी थी. हां, उन लोगों के नेतृत्व में भी भारत ने गलतियां की थीं, जैसे कि 2018 में दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड का दौरे में, लेकिन उस टीम में संघर्ष करने का जज्बा था और धैर्य भी था. और यह कौशल अतीत में किसी अन्य भारतीय टीम में नहीं था. द्रविड़ के बचाव में ये कहा जा सकता है कि वर्कलोड मैनेजमेंट, चोटों या COVID-19 के कारण भारत के पास छह अलग-अलग कप्तान थे और विभिन्न लीडरों की अपनी एक अलग शैली होती है जिससे एक स्थिर आधार रख पाना मुश्किल होता है. लेकिन यह दुनिया ऐसी है जहां परिणामों को ही लोग देखते हैं और द्रविड़ के नेतृत्व में टीम इंडिया को उसी मापदंड से आंका जाएगा.

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में कैसे पहुंचेगी टीम इंडिया?

मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के तहत भारत को अभी दो और सीरीज खेलनी हैं. बांग्लादेश के खिलाफ दो टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट. सही मायने में भारत सभी छह टेस्ट जीतना चाहेगा ताकि डब्ल्यूटीसी फाइनल में प्रवेश मिल सके. भारत जीत का प्रबल दावेदार है लेकिन ड्रॉ या हार से भारतीय टीम के लिए चीजें बेहद मुश्किल हो जाएंगी. और उसके बाद टी20 विश्व कप 2022 भी नजदीक है. द्रविड़ ने ड्रेसिंग रूम में कर्मियों के बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा,’ इसके बाद अगले टेस्ट मैच का दौर इस उपमहाद्वीप में होगा. हम इस टेस्ट को कोच और चयनकर्ता के रूप में देखेंगे, हम हर मैच के बाद समीक्षा करेंगे.’ यह देखना अभी बाकी है कि क्या भारत नए चेहरों को लाता है और अपनी गलतियों को सुधारता है. लेकिन इतना तो तय है कि कोच राहुल द्रविड़ पर काफी दबाव होगा कि वह टीम में सुधार लाएं क्योंकि अभी तक, खास तौर पर टेस्ट मैचों में, भारतीय टीम का उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है.

राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में भारतीय टीम का प्रदर्शनः

भारत vs न्यूज़ीलैंड, 3 T20Is — 3-0 (जीत)

भारत vs न्यूज़ीलैंड, 2 टेस्ट — 1-0 (जीत)

द अफ्रीका vs भारत, 3 टेस्ट — 2-1 (हार)

द अफ्रीका vs भारत, 3 ODIs — 3-0 (हार)

भारत vs वेस्ट इंडीज, 3 ODIs — 3-0 (जीत)

भारत vs वेस्ट इंडीज, 3 T20Is — 3-0 (जीत)

भारत vs श्रीलंका, 3 T20Is — 3-0 (जीत)

भारत vs श्रीलंका, 2 टेस्ट — 2-0 (जीत)

भारत vs द अफ्रीका , 5 T20Is — 2-2 (ड्रॉ)

भारत vs इंग्लैंड, 5वां टेस्ट – 0-1 (हार)

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