खरीफ फसलों की बुवाई में देरी के बाद किसानों के सामने आई एक और समस्या, कृषि विभाग तक पहुंच रही शिकायत

Farmers

महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ की बुआई ने अब रफ्तार पकड़ ली है. राज्य में इस साल सोयाबीन और कपास की बुवाई सबसे ज्यादा हो रही है. सीजन की शुरुआत से ही बारिश (Rain) में हुई देरी से किसान निराश थे. इसी कारण कम समय वाली फसलों की खेती की ओर ध्यान दे रहे हैं. अब पिछले कुछ दिनों से बारिश सक्रिय है, जिससे किसानों को राहत मिली है. वहीं उस्मानाबाद जिले के किसानों ने अब जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय में बीज अंकुरित नहीं होने की शिकायत दर्ज कराई है. अब तक नकली बीजों की 6 शिकायतें दर्ज की गई हैं. पिछले साल भी किसानों (Farmer) को खराब बीज की समस्या का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद जिले में कुल 5,000 शिकायतें दर्ज की गई थीं.

किसानों का कहना है कि यदि कृषि विभाग समय रहते इस पर ध्यान दे तो नुकसान से बचा जा सकता है. इस साल खरीफ में घर में उगाए गए बीजों (Seed) का विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद, किसान बाजार के बीजों को महत्व दे रहे हैं. कृषि विभाग सीजन की शुरुआत के पहले से ही किसानों से अपिल कर रहा था कि घर के बीजों का ही इस्तेमाल करें. जिले में जो छह शिकायतें दर्ज की गई हैं, वो सोयाबीन को लेकर ही हैं. फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

घर के बीजों का ही इस्तेमाल करें किसान

मराठवाड़ा में सोयाबीन खरीफ की प्रमुख फसल है, इसलिए इसका क्षेत्रफल भी बहुत बड़ा है. वहीं दूसरी ओर बाजार में बिकने वाले सोयाबीन के बीज महंगे होते हैं और साथ ही इस बात को लेकर संशय बना रहता है कि वे अंकुरित होंगे या नहीं. कृषि विभाग अपील कर रहा है कि किसान घर में ही उगाए गए बीजों का प्रयोग करते रहें. इसके अलावा बीज बोते समय घर के बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच करना आवश्यक है ताकि अंकुरण की स्थिति की जानकारी मिल जाए. एक ओर जहां खरीफ में बुवाई अब जोरों पर है, तो वहीं दूसरी ओर बाजार में बीजों की कमी देखी जा रही है.

इसी स्थिति का फायदा उठाकर दुकानदार ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में पुराने खराब बीज को बिना अंकुरण क्षमता और अन्य प्रक्रियाओं के चांज किए ही किसानों को बेच रहे हैं. कुछ ऐसे बीजों की बिक्री भी हो रही है, जिनके बारे में पहले कभी नहीं सुना गया था. अब किसान ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. खरीफ सीजन उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. अगर किसानों को नुकसान हुआ तो वे कैसे भरपाई करेंगे.

बीज खरीदते समय बरतें सावधानी

कृषि विभाग धोखाधड़ी से बचने के लिए किसानों को नियमित और पक्की रसीद लेने की सलाह दे रहा है. बिना साधारण बिल लिए कृषि सेवा केंद्र के रजिस्ट्रेशन नंबर, बीज के लिए जीरो एंट्री फीस या उर्वरक की पैकेजिंग के बराबर वजन के साथ रसीद लेना जरूरी है. अगर किसान कर्ज पर खाद लेते हैं तो उन्हें साधारण बिल दे दिया जाता है. इससे किसान ठगे जा सकते हैं, इसलिए अगर सतर्क रह कर बीजों की खरीद करते हैं तो भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.

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