कट्टर समर्थक बोरिस जॉनसन का जाना यूक्रेन के लिए बुरी खबर

Boris Johnson

ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) का पतन भले ही पूरी तरह से उनके अपने और घरेलू कारणों से हुआ हो, लेकिन युनाइटेड किंगडम-यूरोपियन यूनियन से यूक्रेन के सबसे कट्टर समर्थक का बाहर जाना वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के लिए चिंता का विषय है. जॉनसन पिछले जी-7 और नाटो शिखर सम्मेलन जैसे युद्ध (Russia Ukraine War) संबंधित यूरोपीय परिषदों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे मुखर विरोधी रहे हैं और उन्होंने युद्ध के दौरान अपने देश में अपनी छवि बेहतर करने के लिए यूक्रेन की यात्रा तक की. लेकिन ब्रिटेन में राजतंत्र का समर्थन करने वाली टोरी पार्टी के पार्टीगेट विवाद और जन-समर्थन की कमी से ही जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) के अपने सबसे कट्टर समर्थक खो देने की बात साफ हो गई थी. अपनी विदेश मंत्री लिज़ ट्रस के साथ जॉनसन रूस के खिलाफ लगाए गए यूके के प्रतिबंधों के मुख्य सूत्रधार रहे हैं.

उन्होंने यूक्रेन को 4.5 बिलियन डॉलर की सहायता भी प्रदान की है. यह देखना बाकी है कि उनका उत्तराधिकारी चाहे कोई भी हो उनकी ही तरह रूस के खिलाफ उत्साह दिखाता है या नहीं. ब्रिटेन में युद्ध के कारण 1982 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी महंगाई को देखते हुए (मुद्रास्फीति वहां 9 फीसदी तक पहुंच गई है) और तेल समेत रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद यूके का अगला प्रधानमंत्री यूक्रेन को समर्थन तो देता रहेगा मगर पहले से थोड़ा कम मुखर होकर. लेकिन यूक्रेन की चिंता केवल ब्रिटेन नहीं है. रूस के खिलाफ यूएस-नाटो युद्ध में समर्थन देने वाले कई दूसरे यूरोपीय देश भी अपने यहां राजनीतिक घटनाक्रम के कारण यूक्रेन की ज्यादा सहायता नहीं कर पाएंगे. यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में अभी-अभी संपन्न हुए चुनाव और चुनावों का सामना करने वाले प्रमुख देशों में सत्तारूढ़ सरकारों की लोकप्रियता रेटिंग भी ऐसे ही संकेत देते हैं.

उदाहरण के लिए नाटो शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाले स्पेन में प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के नेतृत्व में सत्तारूढ़ सोशलिस्ट (समाजवादी) को 18.4 प्रतिशत के साथ देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत अंडलूसिया के प्रांतीय चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है. यह हार नाटो शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले हुई है और संसदीय चुनाव से सिर्फ 18 महीने पहले. दक्षिणपंथी पॉपुलर पार्टी की जीत यूरोपीय संघ और नाटो के लिए बुरी खबर है. 36 साल में पहली बार अंडलूसिया में सोशलिस्ट पार्टी की हार हुई है. यह नुकसान पिछले साल मई में मेड्रिड में और इस साल फरवरी में कोस्टिले लियोन में हार के बाद हुई है.

जून में फ्रांस में संसदीय चुनावों में और यूरोप के निर्विवाद नेता, जर्मनी में लगभग एक जैसे परिणाम आए. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के सेंट्रलिस्ट गठबंधन ने संसद में बहुमत खो दिया और मैक्रॉन के मध्यमार्गी-गठबंधन को पीछे छोड़ते हुए वामपंथी जेन-लुग मेरेनचॉन और दक्षिणपंथी मरीन ले पेन के नेतृत्व वाले गठबंधन ने संसद में बहुमत पा लिया. पूरे यूरोप में अंतर्मुखी मगर कट्टर-राष्ट्रवादी लोग अप्रवासियों के खिलाफ हैं. इन देशों में यूक्रेन से पलायन कर आ रहे लोगों का खुले दिल से स्वागत नहीं किया जा रहा है.

यूक्रेन से यूके आने वालों को देश से निकालने की धमकी दी जा रही थी

जॉनसन के राज में भी यूके नहीं चाहता था कि बगैर उचित दस्तावेजों के यूक्रेन के लोग रिफ्यूजी के रूप में आएं. बगैर दस्तावेजों के यूक्रेन से यूके आने वालों को देश से निकालने की धमकी दी जा रही थी. रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से ईंधन की बढ़ी कीमतों और जीवन स्तर में गिरावट जैसे यूक्रेन युद्ध के असर को लेकर यूरोप में हाल के चुनावों में असंतोष व्यक्त किया गया है. यूरोपीय संघ के सांख्यिकीय कार्यालय यूरोस्टेट के मुताबिक यूरोप में मुद्रास्फीति अप्रैल में 7.4 प्रतिशत से बढ़ कर मई में रिकॉर्ड 8.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है.

ईंधन की कीमतों में सबसे तीव्र 39.2 प्रतिशत महंगाई मई में देखी गई जबकि अप्रैल में यह 37.5 प्रतिशत थी. अप्रैल के मुद्रास्फीति के आंकड़ों की तुलना में खाद्य वस्तु, शराब और तंबाकू में 7.5 प्रतिशत, औद्योगिक वस्तुओं में 4.2 प्रतिशत और सेवाओं में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. पूरे यूरोप में मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है और इसके विकास की उम्मीद में भारी कटौती की गई है. कोई आश्चर्य नहीं है कि एक नए सर्वेक्षण से पता चला है कि यूक्रेन युद्ध यूरोप के कम संपन्न देशों में अलोकप्रिय हो गया है. यूरोप में लोकप्रिय धारणाओं को रिकॉर्ड करने वाले यूरोपीय संसद के स्प्रिंग 2022 यूरोबैरोमीटर ने रूस के खिलाफ तो नाराजगी जताई मगर बढ़ती महंगाई के कारण भी असंतोष व्यक्त किया.

बुल्गारिया, हंगरी, माल्टा, रोमानिया, साइप्रस और ग्रीस में 51 प्रतिशत से अधिक आबादी ने कहा, “स्वतंत्रता/लोकतंत्र की कीमत पर भी चीजों के दाम को कम रखना और जीवन स्तर को बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए.” ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल और क्रोएशिया में यह आंकड़ा 49 फीसदी रहा. अब जब युद्ध के समाप्त होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है, यूरोप में महंगाई के और बढ़ने की आशंका है. इससे सत्तारूढ़ सरकारें मुश्किल में पड़ जाएंगी और उनका यूक्रेन के लिए समर्थन भी खतरे में पड़ जाएगा. पीड़ित यूक्रेन के लिए लोगों के लिए सहानुभूति तो जारी है मगर हंगरी और स्पेन जैसे देशों में दक्षिणपंथी पार्टियों की चुनाव में जीत संकेत देते हैं कि यूक्रेन से आने वाले रिफ्यूजियों का स्वागत नहीं किया जाएगा. कम से कम वे उन्हें अपने देश में नहीं चाहते हैं.

सितंबर में और देशों में चुनाव होने हैं

सितंबर में और देशों में चुनाव होने हैं – स्वीडन (संसदीय और स्थानीय चुनाव), चेक गणराज्य (स्थानीय चुनाव) और स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह. अक्टूबर में लातविया, बोस्निया और हर्जेगोविना में संसदीय चुनाव हैं, स्लोवेनिया नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगा, जर्मनी के लोअर सैक्सोनी में स्थानीय चुनाव हैं और पोलैंड में भी स्थानीय चुनाव होंगे. नवंबर में स्लोवेनिया में स्थानीय चुनाव होंगे और स्विट्जरलैंड में एक और जनमत संग्रह होगा. इन जगहों के नतीजे हमें आश्चर्य में डाल सकते हैं.

नवंबर में राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके डेमोक्रेट पार्टी का भविष्य भी निर्धारित होगा क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट के मध्यावधि चुनाव होने हैं. यूक्रेन सहित राष्ट्रपति बाइडेन की नीतियों का इन पर भारी प्रभाव पड़ेगा. अधिकांश रिपब्लिकन बाइडेन की यूक्रेन नीति के समर्थक नहीं हैं. केवल एक हफ्ता पहले रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर-ग्रीन ने चेतावनी दी है कि बाइडेन के यूक्रेन को पूरी तरह से समर्थन देने के कारण रूस के साथ परमाणु युद्ध हो सकता है.

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