इंसान का झूठ पकड़ने वाले पॉलीग्राफ टेस्ट पर सवाल क्यों उठ रहे और लाई डिटेक्टर मशीन को कैसे चकमा दे रहे लोग?

Can You Trust The Results Of A Lie Detector Test And Why Experts Raise Questions Over Polygraph Test

इंसान का झूठ पकड़ने वाले पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) पर सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका की सायकोलॉजिकल एसोसिएशन के विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ शरीर में होने वाले बदलाव के आधार पर यह नहीं मााना जा सकता कि इंसान कुछ छिपा रहा है या झूठ बोल रहा है. इतना ही नहीं, अमेरिका समेत कई देशों की सरकारों का भी यह मानना है कि झूठ (Lie) पकड़ने के लिए सिर्फ पॉलीग्राफ टेस्ट ही काफी नहीं होता. इस मामले पर अमेरिका की नेशनल एकेडमी और साइंसेस का कहना है, 15 मिनट की ट्रेनिंग के बाद ज्यादातर लोग इस टेस्ट के दौरान इस्तेमाल होने वाली लाई डिटेक्टर मशीन (Lie Detector Machine) को भी चकमा दे सकते हैं.

क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट, कोई इंसान कैसे झूठ पकड़ने वाली मशीन को चकमा दे सकता है और बिना टेस्ट किए झूठ का पता कैसे लगाया जाता है, जानिए इन सवालों के जवाब

क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट?

कोई भी इंसान झूठ बोल रहा है या नहीं, इसका पता लगाने लिए लाई डिटेक्टर टेस्ट (Lie Detector Test) किया जाता है. इसे पॉलीग्राफ टेस्ट भी कहते हैं. यह टेस्ट करने के लिए एक मशीन का प्रयोग किया जाता है. जिसे आम भाषा में झूठ पकड़ने वाली मशीन भी कहा जाता है. अब आसान भाषा में इस मशीन के काम करने के तरीके को समझते हैं. यह एक ऐसी मशीन है जो शरीर में आने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करती है और बताती है कि इंसान सच बोल रहा है या झूठ.

कोई इंसान भला लाई डिटेक्टर मशीन को कैसे चकमा देता है?

वंडरपोलिस की रिपोर्ट कहती है, कई ऐसी स्थितियां हैं जब इंसान पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रमाणिकता को प्रभावित कर सकती हैं. जैसे- लाई डिटेक्टर टेस्ट के दौरान इंसान की धड़कनें बढ़ने पर पता चलता है कि वो झूठ बोल रहा है, ऐसी स्थिति को मात देने के लिए पहले खुद को चुटकी काटकर या सुई चुभोकर दिल की धड़कन को बढ़ाया गया. इससे जांच प्रभावित हुई.

कुछ लोगों का दावा है कि अगर रात में नींद अच्छी तरह से ली जाए और उसके बाद पॉलीग्राफ टेस्ट हो तो जांच के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं. यह जांच करने वाले एक्सपर्ट कई बार आरोपी के सच बोलने के बावजूद उसके झूठ बोलने की बात कहते हैं. ऐसा करने पर आरोपी नर्वस हो जाता है. नर्वस होना झूठ बोलने की निशानी मानी जाती है. इस तरह भी इसके परिणाम प्रभावित होते हैं और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं.

बिना टेस्ट के कैसे झूठ का पता लगाया जाता है?

दुनियाभर में कुछ ऐसे विशेषज्ञ भी हैं जो इंसानों के झूठ को पकड़ने में माहिर हैं. ऐसे ही एक विशेषज्ञ हैं मनोविज्ञान के प्रोफेसर एल्डर्ट वर्ज. उनका कहना है, आमतौर पर झूठे बोलने वाले इंसान आपकी आंखों में नहीं देखते. झूठ पकड़ने वालों में कुछ खास खूबियां होती हैं. जैसे- ये बातचीत में इतना माहिर होते हैं कि सच और झूठ में फर्क कर पाते हैं. ये विशेषज्ञ इंसान की बॉडी लैंग्वेज पर भरोसा नहीं करते और ऐसे प्रश्न पूछते हैं जिससे आरोपी को झूठ बोलने का मौका ही न मिल सके. इतना ही नहीं, ये विशेषज्ञ झूठ बोलने वाले को चुनौती देने का मौका ही नहीं देते.

Admission.com
www.lyricsmoment.com
admission9.com
lyricsmoment.com

Leave a Reply

Your email address will not be published.